poem on mother in hindi

January 19, 2012 Admin 1
नींद बहुत आती है पढ़ते-पढ़ते,

माँ, तू होती तो कहता एक कप चाय बना दे.

थक गया हूँ मोटी-मोटी रोटी खाके,

माँ, तू होती तो कहता परांठे बना दे.

वो ही कोशिश रोज़ खुश रहने की,

माँ, तू होती तो कहता मुंझे हँसा दे.

बहुत दूर निकल आया हूँ मैं अपने घर से,

माँ, तू होती तो कहता अपने आँचल में पनाह दे.

घर से दूर मन को मार के मैं रहता हूँ,

माँ, तू होती तो कहता मुझको फिर से बच्चा बना दे.

अपनों से अलग मतलबी संसार से लड़ता हूँ,

माँ, तू होती तो कहता तू खुदको मेरा ढाल बना ले.

माँ, तेरे सपनों की परवाह मैं करता हूँ,

खुदा से रोज़ कहता हूँ, मेरे सपनों को जल्द जवान कर दे.