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Hindi poems | kavita kosh | ख्वाहिशो के पंख

Written by rsrajiv25. Posted in hindi kavita

कुछ ख्वाहिशो के पंख मुझे भी दे दो
इस डूबते हुआ तिनके को सहरा दे दो
कोई मेरी डूबती को कश्ती किनारा दे दो
मुझे भी कोई पतवार और माझी भी दे दो
कुछ ख्वाहिशो के पंख मुझे भी दे दो

मै नन्हे पैरो से कितनी दूर चल पाउगा
गिरते , उठते कब तक संभल पाउगा
कोई थामने वाले हाथ मुझे भी दे दो
कोई अपना साया और साथ भी दे दो
कुछ ख्वाहिशो के पंख मुझे भी दे दो ……

आस्मां को देखकर कब तक सो जाउगा
तारो मै कब तक अपनों को देखता जाउगा
कुछ परियो के कहानिया मुझे भी दे दो
टूटा तारो वाली किस्मत मुझे भी दे दो
कुछ ख्वाहिशो के पंख मुझे भी दे दो

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Comments (2)

  • jay patel

    |

    Wah, it’s too nice website…
    awesome sms quotes…

    Reply

  • Gain Chand Sharma

    |

    KHAWAHISHO K PANKH—————-REALY SWEET AND MEANINGFULL POEM –THNX

    Reply

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