A Very Good Relationship Needs Just Two Things A "Little Time" To Be Spent together And A "True Care" To Be Shown Always...

Heart gets Love; Brain gets Knowledge; Hands get Presents; Lips get Kisses; But only sweet friends like you get my sms/messages.

Hindi kavita | kavita kosh Hindi

Written by rsrajiv25. Posted in hindi kavita

जिंदगी आखिर जिंदगी है
जिंदगी एक गिफ्ट है..
कबूल कीजिये
जिंदगी एक एहसास है..
महसूस कीजिये
जिंदगी एक दर्द है..
..बाँट लीजिये
जिंदगी एक प्यास है..
प्यार दीजिये
जिंदगी एक मिलन है..
मुस्कुरा लीजिये
जिंदगी एक जुदाई है..
सबर कीजिये
जिंदगी एक आंसू है..
पी लीजिये
जिंदगी आखिर जिंदगी है
जी लीजिये 
प्यार जीवन की उपवन है
मुझमे मै नहीं हूँ तुझमे तू नहीं है
तुझमे मै हूँ मुझमे तू है

... फिर क्यों लगती हमको
एक तनहा सी दूरी है

दिल की ये मजबूरी है
मिलना तो जरुरी है

प्यार तो हर राह
अनंत है अधूरी है !

मिलन है चुभन है
यादों में डूबा मन है

खोया मेरा तन है

प्यार की भोली चितवन है
प्यार जीवन की उपवन है

तुम फूल मै शूल हूँ
मै फूल तुम शूल हो

पर भूल से भी प्यारी
फूल ! ना कोई भूल हो !

न तुम तुम रहो
ना मै मै रहूँ

हम दोनों मिल
हर जनम हमतुम रहें

फिर तुम तुम

और मै मै रहूँ क्योकि प्यार
जीवन का उपवन है !
अजनबी सी राहों में,
दूर तक निगाहों में ,
तीश्नगी का मौसम है,
बेरुखी का मौसम है,

आज फिर निगाहों को
बीते कल की प्यास है,

ऐसा लगता है जैसे,
चाँद फिर उदास है,

रंग फीके फीके हैं,
तारे रूठे रूठे हैं,
बादलों का शोर है,
खिज़ां खिज़ां ये दौर है,
इस कदर अकेले में
प्यार की तलाश है,

ऐसा लगता है जैसे,
चाँद फिर उदास है,

अजब है दिल की वेह्शातें,
और आस पास आहटें ,
जिसको ढूँढना चाहो,
उसको ढून्ढ कब पाओ,
फिर रहा हूँ दरबदर ,
मुझे उसकी आस है,

ऐसा लगता है जैसे,
चाँद फिर उदास है,

बात तो करे कोई,
साथ तो चले कोई ,
ख़ामोशी के पहरे हा,
ज़ख़्म दिल के गहरे है,
आज वो मिले मुझको दर्द जिसको रास है ,

ऐसा लगता है जैसे,
चाँद फिर उदास है,
आरक्षण ने क्या दिया ?
हमे बताओ ना,
ये इतना जरुरी क्यों है ?
समझाओ ना ,
तुमने लगाया था इसे विकास के लिए ,
स्वाभिमान से जी सको ,इस अधिकार के लिए ,
लेकिन तुमने पाया क्या ?
दिखाओ ना ,
अन्याय हुआ है तेरे साथ ,मैं मानता हूँ
तुम्हे भी आगे जाने की ललक हैं ,मैं जनता हूँ
आरक्षण तेरी मांग पूरा कर पाया क्या ?
बतलाओ ना
आज तुम और गरीब हो गए हो ,
आज तेरे बंधुओं ने ही खाई खोदी हैं ,
वो लपक लेते है सब कुछ ऊपर से ही ,
और तुम खाई से देख भी नहीं पाते ,
तेरी भूख मिट पाई क्या ?
देश को बताओ ना ,
मै बताता हूँ ,
नहीं . तेरी भूख नहीं मिटी,
उलटे तुझे रोटी देने वाले भी दलिद्र हो गए ,
आरक्षणरूपी राक्षस ने सब कुछ लूट लिया ,
तुम्हारा भी ,हमारा भी
आज सबकुछ भेट चढ़ गया हैं ,
धन-देवता के ,
तुम्हारा भी ,हमारा भी .
लेकिन अब हम क्या करे ?
वो आज भी तेरे तावे पर ही रोटी सकते है ,
और तेरे कुएं का पानी पीते हैं ,
क्या तुम विरोध कर पाओगे ?
मेरा हौसला बढाओ ना ,
हम साथ लड़ेगे ,इन दानवों से
इन आरक्षण के रखवालो से ,
हम जीत जाएगे ,तुम साथ तो आओ ना . 
फिर कोई उम्मीद में
देखता है, दूर तक
मगर धूल ही धूल है
नजर कोई आता नहीं
धोखा तो नहीं है ये
कोई उठा हुआ तूफ़ान है
चला तो, मैं भी हूँ
चीरता हुआ अंधेरों को
मुझे पता है अँधेरे के
गर्भ में उजाले का
प्रसव रोज होता है
दोस्ती की पत्थरों से
हमारा असर तो देखो
कभी भगवान् बन
पत्थर मोम हो गये

... छोटी सी नदियाँ थे
मिल तो हम भी गये
खारे समंदर में ,पर जाते जाते ,
कई प्यासों की प्यास
बुझाते हुए चलते गये,

हम भी कभी वृक्ष थे
जीते जी दिए ,फल
दी हवा ,पथिकों को छाया
आशियाना पंछियों को
पत्तियां बनी कभी चारा
और जब गिरे तो
तेरे घर की चौखट बने

हम किस सफ़र में चले
साथ जो भी निकला
हमे आजमाने चला
और साथजो हो लिया, उसे भी
अब लोग आजमाने लगे
मुहँ छिपाने से
आँख बंद कर लेने से
मुसीबतें टला नहीं करती
आँख खोल अक्सर तो ये
कई बार आँख मिलाते
डर जाती हैं

तेरी चुप्पी तुझे
कटघरे में ला देती है
तू भी तो हुंकार भर
देख और आजमा
कैसे लोग ऊँची आवाज में
झूठ को सच साबित करते है

सच ही बोल
अरे बोल तो सही
लोग मौन को अब
कहाँ समझते हैं
जोर से कह
देख ये तमाम
भौम्पू अपने झूठ को
सच साबित करते हैं

अब मौन से
काम न चलेगा
सच को सामने
लाना ही होगा
अब अन्धो को
चाँद दिखता नहीं
उन्हें ऊँची आवाज में
बताना होगा
साथ मिलता नही यहाँ किसी का..
अकेले ही यहाँ चलना पड़ता है..

धूप की फ़िक्र कर रहा तू..
यहाँ अंगरो पर जलना पड़ता है..
... ...
खवाब बुनता चाँदनी रातो के..
यहाँ घने अंधेरे मैं रहना पड़ता है..

नाम है ज़िंदगी इस चीज़ का अंजान.
दुख हो हज़ार पर हँसना पड़ता है

मत करना तू गम किसी के बिछड़ने का.
हमराज़ अजनबी से यहाँ बनना पड़ता है..

मिलता नही सहारा गिरने पर ..
खुद ही अक्सर यहाँ संभलना पड़ता है..

जी अपनी ज़िंदगी एक काफ़िर की तरह
अक्सर अपना ठिकाना बदलना पड़ता है..

क्यों बेचैन तू अपनी तकलीफो से
इनका सामना तो हर मुसाफिर को करना पड़ता है

आते है काँटे हज़ार रास्ते मैं..
चलना है तो दर्द सहना ही पड़ता है..
अगर यकीं नहीं आता तो आजमाए मुझे
वो आईना है तो फिर आईना दिखाए मुझे

अज़ब चिराग़ हूँ दिन-रात जलता रहता हूँ
मैं थक गया हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे
...
मैं जिसकी आँख का आँसू था उसने क़द्र न की
बिखर गया हूँ तो अब रेत से उठाए मुझे

बहुत दिनों से मैं इन पत्थरों में पत्थर हूँ
कोई तो आये ज़रा देर को रुलाए मुझे

मैं चाहता हूँ के तुम ही मुझे इजाज़त दो
तुम्हारी तरह से कोई गले लगाए मुझे
मन में पतझड़,दिल में सहरा,आँख में बादल व्यथा
हर जगह नए रंग में है प्यार की पागल व्यथा

कह रही हैं रूह में उतरी हुयीं ये खुशबुयें
प्यार भीगा दिल जला तो हो गयी संदल व्यथा

झील के पानी में जैसे कोई कंकड़ फेंक दे
जिन्दगी को दे गयी फिर इस तरह हलचल व्यथा

और तो हर रास्ते पर शूल की तरह चुभी
किन्तु हरदम प्यार के पथ पर रही मखमल व्यथा

और सारे लोग तो इक दिन पराये हो गए
हर सफ़र में साथ थी तो बस मेरी चंचल व्यथा
Jevan ke sune aangan main
Deep jala gaya koi
Jeene ki fir ek
Aas jaga gaya koi.

... Mujhe mere hee anjuman main
Kaid kar gaya koi
Behte dariya ko
Kinara dikha gaya koi.

Preet ki jhankar se
Man jhankrit kar gaya koi
Tuttae huye saas ko
Amritras peela gaya koi

Patjhar si bikhri daman ko
Bahar de gaya koi
Navjeevan ki aabha ko
Motiyo main peero gaya koi

Ghir aayi thi ghanghor kaali ghatayain
Phir bhi bhor ki lalima dikha gaya koi
Divyapunj ban pragatipath par
Badhne ki rah dikha gaya koi

Tufano se ghiri jevan dhara ko
Manzil tak pahooncha gaya koi
Manjhdhaar main dubti naiya ko
Sahaj kinara laga gaya koi.
Raah mein kante chubh jayein
Chalna na chor dena tum
Bin-bin kaaton ko
Phool bikherna tum

... Zindagi ke safar mein dard bhare ho
Safar mein mooh na mor lena tum
kadam-kadam mein safar ka
Lutf uthana tum

Gujarte Waqt ke dagar kathin hon
waqt ke tufan se dar na jana tum
Pag-pag saath tufano ke
Chalte rahna tum

Paon jal jayein raah mein
Sahar na bhool jana tum
Basar ka kukurmutte sa jeewan
Marubhoomi mein jeewan basana tum
हम बदलते वक़्त की आवाज़ हैं
आप तो साहब यूँ ही नराज़ हैं

आप क्यों कर मुत्मुइन होंगे भला
हम नई तहज़ीब का अंदाज़ हैं
...
हम वही नन्हें परिन्दे परिन्दे हैं हुज़ूर
जो नई परवाज़ का आग़ाज़ हैं

भोर के सूरज की हम पहली किरन
आप माज़ी का शिकस्ता साज़ हैं

आप जिस पर्बत से डरते है जनाब
हम उसे रौंदेंगे हम जाँबाज़ हैं

फैसला चलिए करें इस बात पर
तीर हैं हम आप तीरंदाज़ हैं
टूटती है सदी की ख़ामोशी
फिर कोई इंक़लाब आएगा

मालियो! तुम लहू से सींचो तो
बाग़ पर फिर शबाब आएगा
...
सारा दुख लिख दिया भविष्यत को
मेरे ख़त का जवाब आएगा

आज गर तीरगी है किस्मत में
कल कोई आफ़ताब आएगा

Incoming search terms:

  • santra par kavita
  • geeta kavitha com rainfall poem
  • hindi poem on धूल

Tags: , ,

Trackback from your site.

Leave a comment

You must be logged in to post a comment.