childhood poems in hindi | मेरा बचपन वो याद आता है,

By | January 10, 2012
मुझ को ममता वो याद आती है, मेरा बचपन वो याद आता है, मेरा बाबुल झूलता भाहों में, सारा बचपन वो याद आता है, मुझ को बांहों में वो झुलाते था, खुद को झुला मेरा बनता था, मुझको ममता वो याद आती है, रोज़ यादें मुझे सताती है, आँखे सावन बनके जाती है, यादें बचपन की मुझे सताती है, मेरे भाई और मेरी बहने, मेरे मान बाप के थे सब गहने, कितना प्यारा वो ज़माना था, आज ये दौर केसा आया खुदा, सरे बिचाद कर दूर भेथे है, अपनी-अपनी कहानी ये कहते है, दूर बेठे सभी ख़ुशी से है, भूल बैठे है ममता बाबुल को, मेरी बहने कितनी प्यारी है, करती वो प्यार आज भी कितना, मेरे बाबुल की ये कहानी थी, चार दिन की वो जिंदगानी थी, मेरे बाबुल की ये कहानी थी, कभी उन की भी तो जवानी थी, हम को भी आयेगा बुढ़ापा जब, याद आयेगा उनका साया तब, है अभी वक़्त तुम संभल जाओ, उनको नज़दीक अपने ले आओ, बाद में फिर तुम न पछताना, जब करेंगे तुम्हारे साथ येही, जो तुम्हारी नज़र के तारे है, प्यार माँ-बाप को करो सब तुम, अपनी अख्रात को सवारों तुम, माफ़ी मोला से मांगलो सब तुम। यादें बचपन की मुझे सताती है...
एक बचपन का जमाना था, जिस में खुशियों का खजाना था.. चाहत चाँद को पाने की थी, पर दिल तितली का दिवाना था.. खबर ना थी कुछ सुबहा की, ना शाम का ठिकाना था.. थक कर आना स्कूल से, पर खेलने भी जाना था... माँ की कहानी थी, परीयों का फसाना था.. बारीश में कागज की नाव थी, हर मौसम सुहाना था..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *