Anna Hazare SMS in Hindi

August 25, 2011 Admin 0
एक बार फिर अपने कर में चक्र सुदर्शन धारो अन्ना
भ्रष्ट तंत्र के हर पालक का अब तो शीश उतारो अन्ना
सारी दुनिया तुममे कोई कृष्ण कन्हैया देख रही है
शिशुपाल जरासंघ कंस पूतना को फिर मारो अन्ना
ऐ खाकनशीनों उठ बैठो वह वक्त करीब आ पहुंचा है, जब तख्त गिराए जाएंगे, जब ताज उछाले जाएंगे। अब टूट गिरेंगी जंजीरें, अब जिंदानों की खैर नहीं, जो दरिया झूम के उठे हैं, तिनकों से न टाले जाएंगे...
कितने बेबस वक़्त के अन्दर रहते हैं
एक शिकस्ता मंज़र बनकर रहते हैं
आज वतन की हालत ऐसी है
हम गाँधी के बन्दर बन कर रहते हैं
बहुत हुआ हाथ बांध इंतजार, संघर्ष का न ठहराव हो,
बेपरवाह हुई संसद ये , संसद का घेराव करो
अब तो कुत्ते भी छुप छुप के घूम रहे है ग़ालिब....
कोई दिग्विजय समझ कर जूता न मार दे !
मौजूदा राजनीतिक संकट से निपटने के लिए कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को भौंकपाल नियुक्त किया है!
सरकार और नेताओं को गुमान है कि वही इस देश के सर्वेसर्वा हैं। दंभ तो रावण का भी नहीं चला, इन काले अंग्रेजों की तो औकात ही क्या है!!!
सरफरोशी की तमन्न अब हमारे दिल में हैं | देखना है जोर कितना हुक्मरानों के बाज़ू  में है - जय हिंद 
यदि अन्ना की शादी हो गई होती तो यह आंदोलन कभी न होता। क्योंकि, तब मामला कुछ ऐसा होता-
1. कहां जा रहे हो ?
2. अकेले तुम्हें ही पड़ी है अनशन में जाने की
3. ये केज़रीवाल का साथ छोड़ो
4. वो बाल कटी वाली लड़की कौन है ? बार-बार बगल में आकर बैठती है
5. शाम तक आ जाओगे न ?
6. पहुंचते ही फोन करना...वगैरह वगैरह..
7. बिजली के बिल देने के पैसे नहीं हैं और आप लोकपाल बिल ले आए हो
8. ये केज़रीवाल तुम्हें मरवाएगा
9. मुन्ना के लिए दो चार फ्री की टोपी ले आना

Patriotic poems in Hindi language

August 24, 2011 Admin 0

जहाँ हर चीज है प्यारी
सभी चाहत के पुजारी
प्यारी जिसकी ज़बां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

…जहाँ ग़ालिब की ग़ज़ल है
वो प्यारा ताज महल है
प्यार का एक निशां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

जहाँ फूलों का बिस्तर है
जहाँ अम्बर की चादर है
नजर तक फैला सागर है
सुहाना हर इक मंजर है
वो झरने और हवाएँ,
सभी मिल जुल कर गायें
प्यार का गीत जहां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

जहां सूरज की थाली है
जहां चंदा की प्याली है
फिजा भी क्या दिलवाली है
कभी होली तो दिवाली है
वो बिंदिया चुनरी पायल
वो साडी मेहंदी काजल
रंगीला है समां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

कही पे नदियाँ बलखाएं
कहीं पे पंछी इतरायें
बसंती झूले लहराएं
जहां अन्गिन्त हैं भाषाएं
सुबह जैसे ही चमकी
बजी मंदिर में घंटी
और मस्जिद में अजां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

कहीं गलियों में भंगड़ा है
कही ठेले में रगडा है
हजारों किस्में आमों की
ये चौसा तो वो लंगडा है
लो फिर स्वतंत्र दिवस आया
तिरंगा सबने लहराया
लेकर फिरे यहाँ-वहां
वहीँ है मेरा हिन्दुस्तां