Category: hindi kavita

short hindi poems

तू छू रहा,
गर किसी उंचाई को
अपने गुरुर से बाहर आ
के खुदा भी कभी-कभी
आ जाता है, जमीं पर
वो देख यहाँ जितने भी
दरख़्त हैं जो लदे हैं फलों से
सब झुके हुए हैं
जो अकड़ के खड़े हैं
उनका हश्र तूफानों के बाद
जमीन बता देती है