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Patriotic Hindi poems

जो भरा नहीं है भावों से जिसमें बहती रसधार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। इसमें चंदा की शीतलता, इसी में सुन्दरता सर की। इसी में रामायण गीता, इसी में मोहम्मद और ईसा॥ ये भावों की अभिव्यक्ति, ये है देवों की भी वाणी। …इसी में प्यार पिता का तो,… Read More »