Hindi poems | poem in hindi language

आसमान से जितनी शबनम रोज बरसती है
उससे ज्यादा इस धरती पर धुप बिखरती है

अहसासों को कहाँ जरुरत होती भाषा की
खुशबू कितनी ख़ामोशी से बातें करती है

कुछ सपने तो सारे जीवन शौक मनाते हैं
जब भी दिल में घुटकर कोई ख्वाहिश मरती है

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